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कोचिंग उद्योग पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।

कोचिंग उद्योग पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।
Written by priyanshu singh

प्रस्तावना – आधुनिक युग में प्रत्येक व्यक्ति के लिए ‘शिक्षा’ एक आवश्यकता ‘वन चुकी है। आज स्कूली शिक्षा के अतिरिक्त अनेक प्रकार की शिक्षाओं का प्रचलन है। आज सरकारी या निजी संस्थानों में जो शिक्षा दी जा रही है, उनकी परीक्षाओं की तैयारियों बिना कोचिंग के सम्भव नहीं हैं। आज से दस साल पहले तक केवल कमजोर विद्यार्थी ही कोचिंग लेते थे, किन्तु अब यह अवधारणा बदल चुकी है। आज कमजोर विद्यार्थी तो इसलिए कोचिंग लेते हैं ताकि पास हो सकें तथा होशियार विद्यार्थी कोचिंग इसलिए लेते हैं ताकि और भी अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। आज के प्रतियोगितावादी समय में कोचिंग लेना एक आवश्यकता तथा फैशन दोनों बन गया है। इसी कारण आज कोचिंग संस्थानों की संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है। अब हमारे देश में लाखों सरकारी तथा निजी पब्लिक स्कूल है, जिनमें अनगिनत बच्चे शिक्षा पा रहे हैं और इन सभी बच्चों के लिए कोचिंग लेना मजबूरी तथा आवश्यकता दोनों बन चुके हैं।

कोचिंग : एक फलता-फूलता व्यवसाय

आज कोचिंग व्यवसाय में काफी मुनाफा है। उपरोक्त प्रकार की कोचिंग तो कोचिंग उद्योग का एक छोटा रूप है कोचिंग व्यवसाय का वास्तविक रूप तो तकनीकी परीक्षाओं, जैसे- मेडिकल इंजीनियरिंग, एम.बी.ए., एम.सी.ए. में प्रवेश के लिए देने वाली परीक्षा की तैयारी है। आज बारहवीं पास करने के बाद विद्यार्थी कोई बड़ी डिग्री हासिल करना चाहता है। पहले डॉक्टर, इंजीनियर बनना लोग बहुत बड़ा काम समझते थे परन्तु आज सभी विद्यार्थी यह सपना आँखों में संजोए पढ़ते हैं, किन्तु डॉक्टर, इंजीनियर बनना तो बाद की बात है, पहले इनमे प्रवेश पाना ही बहुत मुश्किल कार्य है। इनमें प्रवेश पाने के लिए विशेष परीक्षा देनी होती है, जिसके लिए विशेष पढ़ाई करनी होती है और वह पढ़ाई कोचिंग सेन्टरों में ही कराई जाती है। आजकल सभी बड़े शहरों में ऐसे कोचिंग संस्थान चल रहे हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, एम.बी.ए., एम.सी.ए. आदि में प्रवेश परीक्षा की तैयारी करा रहे हैं आज दिल्ली मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, चण्डीगढ़, लखनऊ, गाजियाबाद आदि बड़े शहरों के अतिरिक्त छोटे शहरों में भी कोचिंग सेन्टर चल रहे हैं जिनमें लाखों छात्र-छात्राएँ पढ़ रहे हैं। इन सभी शहरों में कोचिंग सेन्टर एक अच्छा व्यवसाय है किन्तु कोचिंग उद्योग जहाँ पूरी तरह विकसित हो चुका है और यह है कोटा (राजस्थान)।

आज कोटा में सौ से भी अधिक छोटे बड़े कोचिंग संस्थान हैं, जिनमें लगभग 60,000 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। यहाँ देश के कोने-कोने से बच्चे जाते हैं। कुछ प्रमुख कोचिंग संस्थान रोजेनेन्स, केरियर पॉइन्ट, दासवानी आदि हैं। इन संस्थानों की फीस काफी महँगी है परन्तु शिक्षा का स्तर भी काफी ऊँचा है। आज जिस प्रकार जमशेदपुर अपने स्टील उद्योग तथा अहमदाबाद, मुम्बई आदि सूती वस्त्र उद्योग के लिए जगप्रसिद्ध हैं, ठीक उसी प्रकार कोटा भी अपने कोचिंग उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। राजस्थान सरकार को भी इस उद्योग से काफी मुनाफा हो रहा है क्योंकि यहाँ पढ़ने आए विद्यार्थियों के कारण लाखों लोगों का आवागमन लगा रहता है जिस कारण होटल, पर्यटन, खान-पान आदि का भी अच्छा चलता रहता है। कोटा में मुख्यतया मेडिकल तथा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारियाँ बहुत अच्छी कराई जाती हैं।

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इनके अतिरिक्त एन.डी.ए., सी.डी.एस. (सैन्य सेवा तथा सिविल सेवाओं (J.A.S., P.C.S., I.P.S.) में प्रवेश के लिए अनेक संस्थान चल रही हैं। दिल्ली, लखनऊ, इलाहाबाद, देहरादून, पटना तथा प्रत्येक राज्य की राजधानी में और इन स्थानों पर जहाँ राज्य लोक सेवा आयोग स्थित है, यहाँ पर सिविल सेवाओं के कोचिंग संस्थान बड़ी मात्रा में चल रहे हैं।

उपसंहार – निष्कर्ष रूप में हम यह कह सकते हैं कि कोचिंग व्यवसाय आज एक बड़ा व्यवसाय बन चुका है। कोचिंग सेन्टरों में पढ़ाने वाले शिक्षक लाखों रुपए प्रति माह कमा रहे हैं। माता पिता भी बच्चों की शिक्षा पर यह सोच पैसा खर्च कर रहे हैं कि आज प्रतियोगिता का युग है, सब एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगे हैं। इसलिए विना अच्छी शिक्षा प्राप्त किए बच्चों का भविष्य उज्ज्वल नहीं हो सकता।

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