Sociology

लोकरीति का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

लोकरीति का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Written by priyanshu singh

लोकरीति का अर्थ– ‘जनरीति’ शब्द अंग्रेजी शब्द ‘Folkways’ का हिन्दी रूपान्तर है। इसका प्रयोग सर्वप्रथम श्री समनर ने अपनी पुस्तक ‘Folkways’ में किया। इस शब्द के द्वारा श्री समनर उन रीतियों या व्यवहारों का बोध कराना चाहते हैं जो जनता की रीतियां हैं। इनको लोकरीति के नाम से भी पुकारा जाता है।

इस प्रकार जनरीति का शाब्दिक अर्थ ‘जनता की रीति’ है, अर्थात् व्यवहार या आदत जो कि से सम्बन्ध रखती है। दूसरे शब्दों में, जब किसी व्यक्ति की आदत समस्त जनता की आदत के रूप में परिणत हो जाती है या समूह की आदत हो जाती है तो उसे जनरीति कहा जाता है। वास्तव में एक सामाजिक प्राणी के रूप में मनुष्य सुबह से शाम तक अनेक व्यवहार अथवा कार्यों को करता है। इन व्यवहारों एवं कार्यों को समाज के अनेक लोग अपनाते हैं जिससे कि समाज के कुछ व्यवहारों में समानता आ जाती है। यही सामान्य व्यवहार जनरीतियां कहलाते हैं। | गुरु के पैर छूना, बड़ों को नमस्ते करना, सड़क के बायीं ओर चलना आदि जनरीतियों के कुछ उदाहरण हैं।

परिभाषा – सर्वश्री मैकाइवर तथा पेज के अनुसार, “जन रीतियां समाज में मान्यता प्राप्त या स्वीकृत व्यवहार करने की पद्धति है।”

श्री ग्रीन ने जनरीतियों की परिभाषा करते हुए कहा है कि “कार्य करने की वे रीतियां, जो एक समाज या समूह में सामान्य होती हैं और जो एक पीढ़ी से दूसरी को हस्तान्तरित होती हैं, जनरीतियों के नाम से जानी जाती हैं।

इतना ही नहीं, श्री समनर का भी कथन है कि जनरीति समूह की आदत को कहते हैं अथवा जो कार्य समूह द्वारा मान्य होते हैं और अधिकतर व्यक्तियों द्वारा किए जाते हैं, जनरीतियां कहलाते हैं।”

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि स्वतःचालित व्यवहारों को व्यवस्थित करने वाली स्वीकृत सामूहिक ऐतियों को ही जनरीतियां कहा जाता है।

इस सम्बन्ध में एक बात अति महत्वपूर्ण यह है कि जनरीतियों में नैतिक महत्व की कोई बात नहीं होती। एक जनरीति ‘अच्छी’ या ‘बुरी’ दोनों प्रकार की हो सकती है। इसके अतिरिक्त यह भिन्न-भिन्न समाजों में अलग-अलग महत्व भी रखती है। अमरीका में किसी को विद्य देते समय ‘चुम्बन’ (kissing) एक जनरीति है जो कि उस समाज में एक ‘अच्छी’ रीति मानी जाती है। भारतीय समाज में यही देति ‘अनुचित’ एवं ‘गन्दी’ रीति कही जाएगी।

जनरीतियों की प्रमुख विशेषताएं

उपरोक्त वर्णन के आधार पर जनरीतियों कुछ प्रमुख विशेषताओं को निम्नलिखित रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

1.स्वतः उत्पत्ति (Spontaneous origin)

जनरीतियों की प्रमुख विशेषता यह है कि उनकी उत्पत्ति किन्हीं मानवीय प्रयत्नों द्वारा न होकर स्वतः ही होती है। वास्तव में सामाजिक अन्तः क्रियाओं (social interactions) के मध्य इनका आप से आप ही विकास हो जाता है। जनरीतियों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में सर्वश्री समनर और केलर (Sumner and Keller) ने अत्यन्त ही सरल शब्दों में कहा है कि “सामान्य आवश्यकता का सामना करने की जरूरत होने पर प्रायः अनेक व्यक्तियों द्वारा एक साथ या कम-से-कम एक प्रकार से मामूली कार्यों को बार- बार दोहराने से ही जनरीतियों की उत्पत्ति होती है।”

2. मान्य व्यवहार (Approved behaviour)

जनरीतियों की दूसरी प्रमुख विशेषता यह है कि ये समूह विशेष के मान्य व्यवहार होती हैं। वास्तव में वही आदतें या कार्य या व्यवहार जनरीतियों का स्थान ग्रहण करते हैं जिनकी समूह विशेष अपनी मान्यता प्रदान करता है।

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3. मानव व्यवहार की नियन्त्रक (Controller of human behaviour)

जनरीतियां मानव व्यवहार को काफी सीमा तक नियन्त्रित करती हैं। वास्तव में ये मानवीय व्यवहार के नियन्त्रण का प्रमुख साधन होती है। चूंकि अधिकतर व्यक्ति इन्हें मानते हैं अतः जल्द ही इनकी अवहेलना सम्भव नहीं। कहना न होगा इस रूप में जनरीतिया सामाजिक नियन्त्रण का एक प्रमुख साधन होती हैं।

4. भिन्नता (Distinctiveness)

जनरीतियों की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि ये प्रत्येक समाज में भिन्न-भिन्न होती है। इस भिन्नता का प्रमुख कारण सांस्कृतिक भिन्नताएं ही हैं, क्योंकि संस्कृति व्यक्ति के विचार, भावनाओं, कार्यों एवं व्यवहारों को काफी हद तक प्रभावित करती है।

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