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उपभोक्ता संरक्षण पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।

उपभोक्ता संरक्षण पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।
Written by priyanshu singh

प्रस्तावना-जब एक व्यक्ति किसी भी वस्तु को प्राप्त करके पैसे चुकाता है उसे उस मूल्य के समान प्राप्त वस्तु में उपयोगिता भी अवश्य मिलनी चाहिए। यह अर्थशास्त्र में उपभोक्ता नियमानुसार आता हैं कि यदि व्यक्ति को अपने पैसे के अनुरूप सामान में गुणवता प्राप्त नहीं होती है तो वह व्यक्ति विशेष मानसिक अशान्ति का शिकार होता हैं। यह समाज ऐसे दुकानदारो तथा उद्योगपतियो से भरा पड़ा है जो अपने फायदे के लिए उपभोक्ता को हानि पहुँचाते हैं। ये लोग उपभोक्ता को बेकार वस्तु अधिक दामों पर तथा कम तोल कर बेच देते हैं और जब उपभोक्ता को इस बात का आभास होता है तो उसे बहुत दुख होता है। इसी धोखेबाजी को देखते हुए सरकार की ओर से ‘उपभोक्ता संरक्षण कानून’ बनाए गए हैं।

उपभोक्ता संरक्षण कानून की मुख्य बातें

इस कानून के अन्तर्गत उपभोक्ता को कोई भी वस्तु खरीदने से पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए-

  1. वस्तु के निर्माण तथा खराब होने की तिथि अवश्य देख लें।
  2. वस्तु की कीमत, वजन एवं निर्माण तिथि इत्यादि उस वस्तु पर अवश्य लिखी होनी चाहिए।
  3. वस्तु के निर्माता का पता तथा पूरी जानकारी विस्तार में लिखी होनी चाहिए, ताकि कोई शिकायत होने पर उस कम्पनी के मालिक से सम्पर्क स्थापित किया जा सके।
  4. वस्तु पर ISI मार्क अवश्य होना चाहिए।
  5. . उपभोक्ता को कोई भी वस्तु खरीदने के पश्चात् उसकी रसीद अवश्य लेनी चाहिए।
  6. रसीद मिलने पर यह जाँच कर लेनी चाहिए कि उसमें खरीदे गए सामान की सही कीमत, संख्या इत्यादि सही-सही लिखी गई है अववा नहीं ।

यदि हर उपभोक्ता उपर्युक्त लिखी बातों को ध्यान में रखते हुए कोई भी वस्तु खरीदे तो उसे किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। परन्तु कभी-कभी उपभोक्ता जल्दी-जल्दी में कोई वस्तु खरीदता है या फिर वस्तु का सही आंकलन नहीं कर पाता, क्योंकि वह पढ़ा-लिखा नहीं होता, ऐसी स्थिति में कोई भी सन्देह होने पर वह रसीद की सहायता से उत्पादक के खिलाफ कार्यवाही कर सकता है।

उपभोक्ता संरक्षण कानून की आवश्यकता

इस दुनिया में जितने उपभोक्ता है उतने ही उत्पादक भी है। कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो उपभोक्ता न हो इसलिए खरीददारों तथा विक्रेताओं के मध्य वाद-विवाद चलता ही रहता है। स्वार्थी तथा बेईमान उत्पादक तथा विक्रेता मिलकर उपभोक्ता को घटिया माल तो बेचते ही हैं साथ ही उनके साथ बुरा व्यवहार भी करते हैं। उपभोक्ता अपनी मेहनत की कमाई व्यर्थ जाने पर बहुत नाराज हो जाता है और कभी-कभी भी विवाद इतना बढ़ जाता है कि हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए सरकार की ओर से ऐसे कानून बनाए गए। ऐसे कानून बनने से उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहता है तथा उत्पादक भी कुछ गलत करने से पहले कानून के नाम से डरता है।

उपभोक्ता संरक्षण कानून की लोकप्रियता

इस कानून की लोकप्रियता बढ़ाने तथा लोगों में जागरुकता लाने के लिए समय-समय पर रेडियो, दूरदर्शन तथा समाचार-पत्रों आदि के माध्यम से सूचनाएँ प्राप्त होती रहती हैं। इससे एक आम व्यक्ति को हौसला मिलता है कि कभी भी धोखा होने पर वह कानून का दरवाजा खटखटा सकता है। इसलिए हर व्यक्ति का यह कर्त्तव्य हैं कि वह अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहे तथा पूरी देखभाल करके ही सामान खरीदे। ये नियम सभी के लिए उपयोगी है। इन कानूनो का सबसे अधिक प्रभाव महानगरों तथा बड़े-बड़े शहरों में देखा जा सकता है। वहाँ के लोग इन कानूनो का लाभ भी उठा रहे हैं, लेकिन छोटे शहरो एवं गाँवो में अभी भी लोग जागरूक नहीं हुए हैं और कोई भी वस्तु खराब मिलने पर वे या तो चुपचाप बैठ जाते हैं। या फिर दुकानदार से ही लड़ लेते हैं। इसलिए आज गाँवो तथा कस्बो में जागरुकता लाने की सबसे अधिक आवश्यकता है।

उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रति उदासीनता

कुछ लोग तो जानकारी के अभाव में कानून का सहारा नहीं ले पाते, जबकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस धोखे को जानबूझ कर अनदेखा कर देते हैं। ऐसी उदासीनता ही उत्पादको को धोखा देने के लिए प्रोत्साहित करती है। लेकिन हम सबको यह समझना चाहिए कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 तथा 1987 का निर्माण सभी उपभोक्ताओं के हितो की रक्षा हेतु बनाया गया है। उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम के कुछ उद्देश्य हैं-

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  1. ये कानून उपभोक्ताओं को ऐसे सामानो से बचाना चाहते हैं जो उनके जीवन के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
  2. अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
  3. उपभोक्ताओं को समान किस्म की वस्तुओं के प्रतिस्पर्धी मूल्यों से अवगत एवं सुनिश्चित कराना।
  4. उपभोक्ताओं के हितो की रक्षा के लिए उनकी अपील सुनने एवं उनको सुनिश्चित करने के लिए एक फोरम को स्थापित करना । उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम सन् 1991 के बन जाने पर उसके जिला उपभोक्ता फोरम के अधिकारों का विस्तार किया गया है।

उपसंहार- हर चीज के दो पहलू होते हैं। कुछ लोगों ने यहाँ भी उपभोक्ता बन कर झूठी शिकायतें करनी आरम्भ कर दी थी इसलिए सन् 1993 में एक अधिनियम बनाया गया जिसके अन्तर्गत झूठी शिकायत करने वाले उपभोक्ता को भी दंडित किया जाएगा।

आज इन कानूनो के सहारे हम अपने अधिकारो के प्रति जागरूक हो रहे हैं। अपना नुकसान होने पर चुपचाप बैठना भी एक अपराध के समान ही है क्योंकि जब तक हम भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करेंगे तब तक वे आम जनता को ऐसे ही लूटते रहेंगें। इसलिए हम सबको अपने अधिकारो की रक्षा हेतु सही समय पर सही कार्यवाही करनी चाहिए।

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